संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्मार्ट मीटरों को लेकर आम जनता का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है. बुधवार को बड़ी संख्या में स्थानीय ना...
संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्मार्ट मीटरों को लेकर आम जनता का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है. बुधवार को बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक बिजली के बेतहाशा बढ़े हुए बिलों और नए इलेक्ट्रॉनिक मीटरों के खिलाफ विरोध दर्ज कराने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे. जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान वहां मौजूद लोगों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर के सामने ही अपने साथ लाए स्मार्ट मीटरों को सड़क पर पटक कर तोड़ दिया.
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने शासन और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी समस्याओं को लेकर जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें स्मार्ट मीटरों को तत्काल हटाने और बिजली की बढ़ी हुई दरों को वापस लेने की पुरजोर मांग की गई है.
प्रदर्शन में शामिल लोगों का तर्क है कि छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां बिजली उत्पादन के लिए प्रचुर मात्रा में स्थानीय कोयले का उपयोग होता है, इसके बावजूद यहां उपभोक्ताओं पर लगातार महंगी बिजली का बोझ डाला जा रहा है. लोगों का कहना है कि आज के दौर में महंगाई आसमान छू रही है, लेकिन उस अनुपात में आम आदमी की कमाई में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिससे मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों के लिए घर का बजट संभालना बेहद मुश्किल हो गया है.
ऐसे में बिजली के मनमाने बिलों ने उनकी आर्थिक कमर तोड़ दी है. उपभोक्ताओं का दावा है कि उनके घरों में बिजली के किसी भी नए उपकरण का इस्तेमाल शुरू नहीं किया गया है, फिर भी नया मीटर लगते ही हर महीने बिल पहले के मुकाबले काफी ज्यादा आ रहा है, जिससे इस तकनीक की सटीकता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जनता ने इलेक्ट्रॉनिक स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा अविश्वास जताया. ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि इन आधुनिक मीटरों में तकनीकी हेरफेर या गड़बड़ी की गुंजाइश पुरानी प्रणालियों से कहीं अधिक है. लोगों ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि अब बिजली विभाग को किसी के घर जाने की जरूरत नहीं है. वे अपने दफ्तर में बैठकर ही दूर बैठे किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन काट या जोड़ सकते हैं और डिजिटल रीडिंग ले सकते हैं, जिससे भविष्य में आम उपभोक्ताओं का उत्पीड़न बढ़ सकता है.
इसके अलावा, नागरिकों ने आरोप लगाया कि राज्य भर में जनता की मर्जी के बिना, जबरन ये मीटर थोपे जा रहे हैं. कई इलाकों में जब लोगों ने इसका विरोध किया, तो बिजली कर्मियों ने सीधे कनेक्शन काटने की धमकी देकर इन्हें इंस्टॉल कर दिया. हैरान करने वाली बात यह भी रही कि मीटर लगाने आए कई कर्मचारियों के पास किसी प्राधिकृत संस्था का वैध पहचान पत्र तक नहीं था और इस पूरी कवायद को बिना जन सहमति के बेहद जल्दबाजी में अंजाम दिया गया.
अब कलेक्ट्रेट पहुंचे इन नाराज उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन से इस संवेदनशील मामले में तुरंत और निष्पक्ष कार्रवाई करने की गुहार लगाई है. उनकी साफ मांग है कि इन विवादित स्मार्ट मीटरों को निकालकर दोबारा पुराने और भरोसेमंद मीटर स्थापित किए जाएं ताकि आम जनता को राहत मिल सके.
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही बिजली बिलों की समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में इस जन आक्रोश को एक बड़े और उग्र आंदोलन का रूप दिया जाएगा.
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